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बिपिन रावत : शौर्य और साहस का दूसरा नाम

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बिपिन रावत : शौर्य और साहस का दूसरा नाम

तमिलनाडु के नीलगिरी जिले के कुन्नूर में भारतीय वायुसेना के एमआई-17वी5 हेलीकॉप्टर हादसे से न केवल भारतीय सेना के तीनों अंग बल्कि समूचा देश गहरे सदमे में है। दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर में सवार सीडीएस बिपिन रावत और उनकी पत्नी के अतिरिक्त 11 लोगों की मौत ने हर किसी को स्तब्ध कर दिया है। वायुसेना ने घटना की जांच के आदेश दिये हैं।

हेलीकॉप्टर को विंग कमांडर पृथ्वी सिंह उड़ा रहे थे
हादसे का शिकार हुए हेलीकॉप्टर को विंग कमांडर पृथ्वी सिंह उड़ा रहे थे। हेलीकॉप्टर सुलुर के आर्मी बेस से निकलने के बाद जनरल रावत को लेकर वेलिंगटन सैन्य ठिकाने की ओर बढ़ रहा था और सुलूर से करीब 94 किलोमीटर दूर हेलीकॉप्टर अचानक हादसे का शिकार हो गया। किसी भी वीवीआईपी दौरे में इसी हेलीकॉप्टर का उपयोग किया जाता है। हादसे के शिकार हुए हेलीकॉप्टर की तुलना चिनूक हेलीकॉप्टर से की जाती थी, जो डबल इंजन हेलीकॉप्टर था, जिससे इसके एक इंजन में खराबी आने पर दूसरे इंजन के सहारे सुरक्षित लैंडिंग कराई जा सके।

सबसे सुरक्षित हेलीकॉप्टरों में एक एमआई-17वी5
एमआई-17वी5 हेलीकॉप्टर को भारतीय वायुसेना के सबसे सुरक्षित हेलीकॉप्टरों में एक माना जाता है, इसलिए इस प्रकार क्रैश होना बड़े सवाल करता है। दरअसल यह दुनिया के सबसे उन्नत परिवहन हेलीकॉप्टरों में से एक है, जिसे ट्रूप तथा आर्म्स ट्रांसपोर्ट, फायर सपोर्ट, काफिले एस्कॉर्ट, पेट्रोल और सर्च-एंड-रेस्क्यू मिशनों में भी तैनात किया जा सकता है। इसका अधिकतम टेकऑफ वजन 13 हजार किलोग्राम है और यह 36 सशस्त्र सैनिकों सहित आंतरिक रूप से 4500 किलोग्राम भार ले जा सकता है। यह हेलीकॉप्टर उष्णकटिबंधीय और समुद्री जलवायु के साथ-साथ रेगिस्तानी परिस्थितियों में भी उड़ान भरने की क्षमता रखता है। इसका केबिन काफी बड़ा है, जिसमें पोर्टसाइड दरवाजा है, जो पीछे की तरफ रैंप सैनिकों और कार्गाे के आसानी के प्रवेश और निकास की अनुमति देता है। हेलीकॉप्टर एक विस्तारित स्टारबोर्ड स्लाइडिंग डोर, रैपलिंग और पैराशूट उपकरण, सर्चलाइट, एफएलआईआर सिस्टम जैसे कई आधुनिक प्रणालियों से सुसज्जित है।

एमआई-17 हेलीकॉप्टरों के लिए रूस के साथ हुआ था सौदा

रक्षा मंत्रालय ने दिसम्बर 2008 में 80 एमआई-17 हेलीकॉप्टरों के लिए रूस के साथ 1.3 अरब डॉलर का सौदा किया था, जिनकी आपूर्ति भारतीय वायुसेना को 2011 में शुरू हुई थी और रूस द्वारा भारत को 2016 में आखिरी हेलीकॉप्टर सौंपा गया। कई आधुनिक तकनीकों के साथ निर्मित इस हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल सेना के कई महत्वपूर्ण अभियानों में हुआ है। 2008 के मुम्बई आतंकी हमले के दौरान कमांडो ऑपरेशन में भी इसका इस्तेमाल हुआ था, जब इसी हेलीकॉप्टर के जरिये कोलाबा में एनएसजी कमांडो को आतंकियों के खिलाफ उतारा गया था। 2016 में जम्मू-कश्मीर में सीमा पर पाकिस्तानी लांच पैड को तबाह करने के लिए भी एमआई-17वी5 का इस्तेमाल हुआ था। वैसे विगत पांच वर्षों में अब तक कुल छह बार ये हेलीकॉप्टर दुर्घटना के शिकार हो चुके हैं।

अरुणाचल प्रदेश के तवांग के पास 6 मई 2017 को एक एमआई-17 हेलीकॉप्टर उड़ान भरने के दौरान हादसे का शिकार हो गया था, जिसमें पांच जवानों के अलावा दो अन्य लोगों की मौत हो गई थी। उसके बाद उत्तराखंड के केदारनाथ धाम में 3 अप्रैल 2018 को गुप्तकाशी से पुनर्निर्माण सामग्री लेकर आ रहा एम-आई-17 हेलीकॉप्टर हेलीपैड से मात्र 60 मीटर पहले ही हादसे का शिकार हो गया था, जिसमें सभी बाल-बाल बच गए थे। जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले में 27 फरवरी 2019 को वायुसेना का एमआई-17 लापरवाही के चलते अपनी ही मिसाइल का शिकार होकर क्रैश हो गया था, जिसमें वायुसेना के छह अधिकारियों सहित एक आम नागरिक की मौत हुई थी। केदारनाथ से गुप्तकाशी जाने के लिए उड़ान भरते समय 23 सितम्बर 2019 को भी एमआई-17 हो गया था और उस हादसे में पायलट सहित सभी छह लोग सुरक्षित बच गए थे। 18 नवम्बर 2021 को एमआई-17 हेलीकॉप्टर अरुणाचल प्रदेश में लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में भी पांचों क्रू सदस्य सुरक्षित बच गए थे लेकिन 8 दिसम्बर को हुए एमआई-17 हादसे में सीडीएस बिपिन रावत सहित बाकी लोग इतने खुशनसीब नहीं थे।

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