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प्रोफेसर ने नारियल के पत्ते से बनाई स्ट्रॉ, कम होगा सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल

Eco Friendly Straw

Side Story

प्रोफेसर ने नारियल के पत्ते से बनाई स्ट्रॉ, कम होगा सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल

अक्सर जूस या कोल्ड ड्रिंक पीने के लिए लोग स्ट्रॉ का प्रयोग करते हैं। ये स्ट्रॉ प्लास्टिक की बनी होती है जिसे एक बार उपयोग करने के बाद फैंक दिया जाता है। जिससे प्रदूषण बढ़ता है, लेकिन प्रोफेसर साजी वर्गिस ने नारियल पेड़ के सूखे पत्तों से स्ट्रॉ ( Coconut Leaf Straw ) तैयार कर इसका विकल्प दे दिया है। अब यही स्ट्रॉ ग्रामीण महिलाओं को न सिर्फ आत्मनिर्भर बना रहा है बल्कि ये वोकल फॉर लोकल ग्लोबल स्तर की मिसाल बन चुका है। महिलाएं प्लास्टिक की जगह नारियल के पत्ते से Eco Friendly Straw बना रही हैं।

प्रोफेसर ने कॉलेज के छात्रों के साथ मिलकर बनाई स्ट्रॉ

दरअसल कॉलेज के कैंपस में टहलते हुए जब एक दिन प्रोफेसर साजी वर्गिस ( Prof Saji Varghese ) की नजर नारियल पेड़ के सूखे पत्तों पर पड़ी तो उन्होंने इन पत्तों को जलाने या कचरे के ढेर बनाने की बजाय इसका इस्तेमाल किया। खास तौर से इसका स्ट्रॉ बनाया जा सकता है। कई दिनों तक काफी सोचने के बाद प्रोफेसर ने अपने कॉलेज के छात्रों के साथ मिलकर स्ट्रॉ बनाने की तकनीक बना ली।

Prof Saji Varghese

प्रोफेसर ने नारियल के पत्ते से बनाई स्ट्रॉ, कम होगा सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल

नारियल के पत्ते से इको फ्रेंडली उत्पाद

बता दें कि हर साल एक नारियल का पेड़ अपने स्वाभाविक रूप से अपने 6 पत्ते खो देता है। उन पत्तों को ग्रामीण इलाकों में अधिकांश रूप से जलाया जाता है। लेकिन अब महिलाएं नारियल के पत्ते से इको फ्रेंडली उत्पाद बना रही हैं और महिलाओं को इससे रोजगार भी मिला है, जिससे वे अपना घर चला रही हैं। प्रोफेसर साजी का मकसद साफ था कि तटीय इलाकों में रहने वाली ग्रामीण महिलाओं को इससे रोजगार प्रदान कर सकते हैं। मदुरई, कासल गोड़ और टिटकड़ी में उन्होंने इन मशीन को लगाकर काम शुरू किया। यहां की ग्रामीण महिलाओं को प्रशिक्षण देने के बाद स्ट्रॉ बनाना सिखा दिया और आज उनके पास 25 लाख स्ट्रॉ बनाने का ऑर्डर मिला है।

Coconut leaf straw making machine

प्रोफेसर ने नारियल के पत्ते से बनाई स्ट्रॉ, कम होगा सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही सराहना

साल 2020 में स्टार्टअप लॉन्च पैड में उन्हें अवार्ड भी मिला है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी इस पहल की सराहना भी की गई है। कोविड के बाद बदलते आर्थिक हालात ने प्रो. साजी वर्गिस के इस प्रोजेक्ट के जरिए लोगों को रोजगार देने की योजना बना चुके हैं और हर साल एक हजार ग्रामीण महिलाओं के लिए विशेष रोजगार के अवसर तैयार कर रहे हैं। खास बात ये है कि नारियल से बने ये स्ट्रॉ प्लास्टिक की स्ट्रॉ की जगह ले रहे हैं।

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