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सरकार को कोरोना से लड़ने के बजाय जनमंच की फिक्र : सुक्खू

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सरकार को कोरोना से लड़ने के बजाय जनमंच की फिक्र : सुक्खू

कांग्रेस विधायक व पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि भाजपा सरकार को कोरोना से लड़ने के बजाय जनमंच की चिंता ज्यादा है। कोविड महामारी की तीसरी लहर का खतरा अभी टला नहीं है। रोजाना 150-200 से ज्यादा नए केस मिल रहे हैं। 3-4 लोग संक्रमण से अपनी जान भी गंवा रहे। 

उन्होंने कहा है कि इसलिए सरकार को जनमंच की जरिये राजनीति चमकाने की जगह जनता की जान बचाने को तवज्जो देनी चाहिए। अभी प्रदेश में जनता को कोविड की पहली ही डोज लगी है। दूसरी डोज लाखों लोगों को लगनी बाकी है। सरकार को यह लक्ष्य भी जल्दी पूरा करना चाहिए। 18 साल से कम उम्र के लिए अभी टीका ईजाद नहीं हुआ है। जल्दी इनके टीकाकरण की कोई संभावना नहीं दिख रही। इसलिए सरकार को अभी जनमंच शुरू करने से बचना चाहिए। क्योंकि, इन आयोजनों से लोगों व किशोर संक्रमण की चपेट में आ सकते हैं। 

सुक्खू ने कहा कि प्रदेश की पात्र जनता को पहली डोज लगाने का श्रेय स्वास्थ्य कर्मियों व अग्रणी कोरोना योद्धाओं को जाता है। सरकार को पीठ थपथपाने के साथ ही इन्हें सम्मानित भी करना चाहिए। जनमंच इसलिए भी जरूरी नहीं है, क्योंकि यह अधिकारियों, कर्मचारियों के लिए झंडमंच बन चुका है। मंत्री इन कार्यक्रमों में अपना रौब दिखाने के लिए अफसरों व कर्मियों को जलील करते हैं। इनके जरिये लोगों के काम सिरे चढ़ाना सरकार का लक्ष्य नहीं है। जनमंच में अपनी समस्याओं को रखने के बावजूद लोगों को न्याय नहीं मिलता। 

उन्होंने सरकार को सुझाव दिया कि प्रदेश में सेवा का अधिकार कानून सख्ती से लागू किया जाए। सेवा का अधिकार आयोग बनाएं। ताकि लोगों के काम तय समय पर हो सकें। तय अवधि में काम न करने वाले लापरवाह अफसरों व कर्मचारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए, न कि ईमानदार व जिम्मेदार स्टाफ को निशाना बनाया जाए।

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