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रिटायरमेंट के बाद भी किसानों के बीच ही मिलते हैं हिमाचल के ये कृषि वैज्ञानिक

Plum farming himachal

AGRICULTURE

रिटायरमेंट के बाद भी किसानों के बीच ही मिलते हैं हिमाचल के ये कृषि वैज्ञानिक

रिटायरमेंट के बाद अक्सर लोग आराम फरमाते हैं और घर बैठकर जिंदगी गुजारते हैं लेकिन एक शख्स ऐसा भी हो जो रिटायरमेंट के बाद भी प्रतिदिन काम पर जाता है। दरअसल हम बात कर रहे हैं डॉ. जेएस चंदेल (Dr. JS Chandel ) की, जो नौणी यूनिवर्सिटी से बतौर कृषि वैज्ञानिक रिटायर हुए हैं। अभी उन्हें रिटायर हुए कुछ ही समय हुआ है लेकिन जेएस चंदेल घर में कम किसानों के बीच ज्यादा मिलते हैं।
JS Chandel photo

रिटायरमेंट के बाद भी किसानों के बीच ही मिलते हैं हिमाचल के ये कृषि वैज्ञानिक

जेएस चंदेल गांव-गांव जाकर कृषि संबंधी जानकारियां किसानों-बागवानों को देते हैं ताकि वो अच्छी फसल ले सकें और उससे मुनाफा कमा सकें। जेएस चंदेल खासकर प्लम और सेब की जानकारी किसानों को देते हैं। इसके लिए वो कोई भी पैसा नहीं लेते। वे निशुल्क तौर पर किसानों की मदद करते हैं।

आपको बता दें कि हिमाचल की आर्थिकी में सेब और स्टोन फ्रूट्स का काफी योगदान है। इसी को ध्यान में रखते हुए जेएस चंदेल किसानों को आधुनिक रूप से बागवानी करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं और साथ ही कृषि को वैज्ञानिक ढंग से करने की सलाह दे रहे हैं। ऐसा करने से जहां किसानों की अच्छी फसल तैयार होगी वहीं उन्हें फसल के अच्छे दाम भी मिलेंगे।

Plum farming himachalजेएस चंदेल ने अपना खुद का बागीचा भी तैयार किया है। अपना बचा खुचा समय वो खुद के प्लम और सेब के बागीचे में बिताते हैं। वहीं जेएस चंदेल फलों की आधुनिक किस्में भी बागवानों को मुहैया करवाते हैं और निराश हो चुके बागवानों को हौंसला देकर उन्हें वैज्ञानिक तरीके से कृषि करने के लिए प्रेरित करते हैं।

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