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Tokyo Olympics में 20 साल बाद उतरेगा भारत का कोई घुड़सवार, पदक की उम्मीद

Fouaad Mirza

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Tokyo Olympics में 20 साल बाद उतरेगा भारत का कोई घुड़सवार, पदक की उम्मीद

कुश्ती, पहलवानी, बैडमिंटन, टेनिंस के अलावा भारत को घुड़सवारी में भी पदक की उम्मीद है और टोक्यो ओलंपिक की घुड़सवारी स्पर्धा में भारत की उम्मीदें फवाद मिर्जा (Fouaad Mirza) पर टिकी हैं। 20 साल बाद ओलंपिक में घुड़सवारी स्पर्धा में भाग लेने वाले फवाद मिर्जा पहले भारतीय होंगे।

फवाद ने लॉन्ग इवेंट प्रतियोगिता स्पर्धा में ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया है, जिसे घुड़सवारी ट्रायल थॉम्ब के तौर पर जाना जाता है। 2018 के एशियाई खेलों में फवाद ने 2 रजत पदक जीतने में सफलता हासिल की थी। इस पदक के साथ ही वह 1982 के बाद से घुड़सवारी स्पर्धा में एशियाई खेलों में व्यक्तिगत पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने और और भारत के 36 साल पुराने पदक के इंतजार को खत्म किया।

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Fouaad Mirza

Tokyo Olympics में 20 साल बाद उतरेगा भारत का कोई घुड़सवार, पदक की उम्मीद

अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित फवाद मिर्जा बेंगलुरु से हैं। सिर्फ 6 महीने की उम्र में ही अपने पिता के साथ घोड़े पर सवार हो गए। उन्हें घुड़सवारी विरासत में मिली, उनके पिता डॉ. हसनैन मिर्जा एक घुड़सवार के साथ ही पशु चिकित्सक हैं।

फवाद बताते हैं कि उन्हें घोड़े बहुत पसंद हैं और उनके साथ रहना और काम करना उन्हें अच्छा लगता है। लेकिन बड़े होकर फवाद ने जिस तरह से घोड़े की लगाम अपने हाथ में ली, उससे दुनिया हैरान रह गई। ऐसा नहीं है कि भारत में घुड़सवारी का क्रेज नहीं है, बल्कि भारत में इन खेलों में सेना का प्रभाव है, लेकिन 34 साल के फवाद का संबंध सेना से नहीं है।

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