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व्हीकल स्क्रैपिंग पॉलिसी का ऐलान, जानें स्क्रैप पॉलिसी की महत्वपूर्ण बातें | Scrap Policy

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व्हीकल स्क्रैपिंग पॉलिसी का ऐलान, जानें स्क्रैप पॉलिसी की महत्वपूर्ण बातें | Scrap Policy

देश में व्हीकल स्क्रैपिंग नीति (Vehicle Scrapping Policy) की घोषणा कर दी गई है। लोकसभा में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari Scrappage Policy) ने बताया कि इसका उद्देश्य प्रदूषण फैलाने और खराब गुणवत्ता वाले वाहनों को चरणबद्ध तरीके से इस्तेमाल से हटाने की व्यवस्था तैयार करनी है। ये पॉलिसी क्या है और इससे पुराने वाहनों को फर्क पड़ेगा? आइए विस्तार से जानते हैं।

व्हीकल स्क्रैपिंग नीति (Scrap Policy) की विशेषताओं और नए नियम

>खराब गुणवत्ता वाले या पंजीकरण का नवीनीकरण न कराने वाले निजी वाहनों की वैधता बीस साल के बाद खत्म कर दी जाएगी।

>फिटनेस प्रमाणपत्र न लेने वाले व्यावसायिक वाहनों का पंजीकरण भी 15 साल के बाद समाप्त कर दिया जाएगा।

>प्रारंभिक पंजीकरण की तारीख से 15 साल तक व्यावसायिक वाहनों पर फिटनेस प्रमाणपत्र के लिए बढ़ी हुई फीस और फिटनेस जांच संबंधी नियम लागू होंगे।

>फिटनेस जांच और स्क्रैपिंग केंद्रों के लिए नियम इस वर्ष पहली अक्टूबर तक अधिसूचित कर दिये जाएंगे।

>सरकारी विभागों और सार्वजनिक उपक्रमों के 15 साल पुराने वाहनों को स्क्रैप करने की समय सीमा एक अप्रैल 2022 रखी गई है।

>भारी व्यावसायिक वाहनों के लिए फिटनेस संबंधी अनिवार्य जांच एक अप्रैल 2023 से शुरू होगी।

>अन्य श्रेणी के वाहनों के लिए भी चरणबद्ध तरीके से फिटनेस जांच पहली जून 2024 से शुरू होगी।

Scrap policy newsस्क्रैप पॉलिसी से ऑटोमोबाइल क्षेत्र में आएगा बड़ा परिवर्तन

इस बारे में जानकारी देते हुए नितिन गडकरी ने कहा कि प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को कम करने से ऑटोमोबाइल क्षेत्र में बड़ा परिवर्तन आएगा। उन्होंने कहा कि इससे वाहनों की ईंधन खपत कम होगी, उद्योगों के लिए कम कीमत में कच्चे माल की उपलब्धता बढ़ेगी और केन्द्र तथा राज्य सरकारों के जीएसटी में वृद्धि होगी। उन्होंने सदन को बताया कि व्हीकल स्क्रैपिंग नीति के लागू होने से देश में तीन करोड़ 70 लाख से अधिक रोजगार सृजित होंगे।

अगले पांच वर्षों में ऑटोमोबाइल क्षेत्र में विश्व का नेतृत्व करेगा भारत

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भारत अगले पांच वर्षों में ऑटोमोबाइल क्षेत्र में विश्व का नेतृत्व करेगा और अगले एक साल में सौ प्रतिशत लिथियम आयन बैटरी का स्वदेश में उत्पादन होने लगेगा। फिलहाल 81% लिथियम आयन बैटरियां देश में बन रही हैं। उन्होंने सांसदों से उनके निर्वाचन क्षेत्रों में वाहनों के लिए फिटनेस केंद्र, प्रदूषण केन्द्र और ड्राइविंग केंद्र बनाने में सहयोग मांगा।

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