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गाय के गोबर से बनाएं पेंट, जानिए क्या है पेंट की खासियतें और कैसे लगाएं पेंट की फैक्टरी

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गाय के गोबर से बनाएं पेंट, जानिए क्या है पेंट की खासियतें और कैसे लगाएं पेंट की फैक्टरी

गाय के गोबर से बना पेंट हाल ही में लॉंच किया गया है। अब इस पेंट से पीएम आवास योजना के मकान की पुताई होगी। इस बारे में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ( Union Minister Nitin Gadkari) ने बताया कि गोबर से बना पेंट ब्रांडेड इनेमल पेंट और डिस्टेंपर के जो भी इंटरनेशनल स्टैंडर्ड हैं उन्हें पूरा करता है। उन्होंने खुद के ऑफिस और घर की भी इसी गोबर और प्राकृतिक पेंट से पुताई करवाई है और देख कर कोई कह नहीं सकता है कि ये गोबर का पेंट हैं। उन्होंने बताया कि अब प्रधानमंत्री आवास योजना, सरकारी ऑफिस आदि में ब्रांडेड पेंट की जगह प्राकृतिक पेंट ( Eco Friendly Vedic Paint) का प्रयोग किया जाएगा। गौरतलब है कि सड़क परिवहन और राजमार्ग और एमएसएमई मंत्री नितिन गडकरी को वेस्ट को वेल्थ बनाने और इको फ्रेंडली नवाचारों के लिए जाना जाता है। गडकरी अभी कई ऐसे प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं।

Nitin Gadkari house painted with gobar paintक्या है गोबर से बने पेंट की खासियत

बता दें कि ‘खादी प्राकृतिक पेंट’ नामक यह पेंट पर्यावरण अनुकूल, विष-रहित है। गाय के गोबर से बना पेंट सीसा, पारा, क्रोमियम, आर्सेनिक, कैडमियम तथा अन्‍य भारी धातुओं से भी मुक्‍त है। यह पेंट किफायती और गंधहीन है। इस पेंट को भारतीय मानक ब्‍यूरो द्वारा भी प्रमाणित किया गया है। खादी प्राकृतिक पेंट दो रूपों यानी डिस्‍टेंपर पेंट तथा प्‍लास्टिक इम्‍यूलेशन पेंट में उपलब्‍ध है। इस प्रौद्योगिकी से पर्यावरण अनुकूल उत्‍पादों के लिए कच्‍चे माल के तौर पर गाय के गोबर की खपत बढ़ेगी और किसानों तथा गोशालाओं की आय भी बढ़ेगी। एक अनुमान के अनुसार किसानों/गौशालाओं की प्रति वर्ष, प्रति मवेशी लगभग 30,000 रुपये की अतिरिक्‍त आय होगी।

Gobar paint in homeकैसे लगा सकते हैं गोबर से पेंट बनाने की फैक्ट्री

इस पेंट की फैक्टरी में 12-15 लाख की लागत आएगी। अगर कोई स्टार्टअप के जरिए शुरू करना चाहे इसके लिए खादी ग्रामोद्योग कमीशन के द्वारा पांच हजार रुपये में सात दिन का कोर्स ( Gobar Paint Training) जयपुर में किया जा रहा है। अभी इसके लिए एक फिल्म बना कर एक ऑडिटोरियम में स्क्रीनिंग की भी योजना है। इसे एक समय में 2200 लोगों को दिखा सकेंगे। ये एक तरह से शॉर्ट ट्रेनिंग होगी। इस तरह से इस बारे में जागरूकता फैलाकर लोगों की गरीबी दूर कर रोजगार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इससे गांव में भी फैक्ट्री खुल सकेंगी।

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