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ये है मशरूम गर्ल दिव्या रावत, नौकरी छोड़ शुरू किया अपना काम, करोड़ों का टर्नओवर

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ये है मशरूम गर्ल दिव्या रावत, नौकरी छोड़ शुरू किया अपना काम, करोड़ों का टर्नओवर

उत्तराखंड के चमोली जिले की दिव्या रावत आज उस मुकाम पर पहुंच गई हैं, जहां तक पहुंचना आसान नहीं होता। दिव्या रावत ने कम उम्र में ही बुलंदियों को छूं लिया है। मशरूम की खेती के जरिए नाम कमानी वाली दिव्या की कंपनी का टर्नओवर आज करोड़ों में पहुंच गया है। मशरूम गर्ल के नाम से प्रसिद्धी हासिल कर चुकी दिव्या का कहना है कि अभी तो महज शुरुआत है। अभी लंबा फासला तय करना है। विश्व में उत्तराखंड का नाम रोशन करना है।

दिव्या रावत अब तक कई अवार्ड अपने नाम कर चुकी हैं। उन्हें राष्ट्रपति द्वारा नारी शक्ति अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। दिव्या के इस सराहनीय प्रयास के लिए उत्तराखंड सरकार ने उन्हें ‘मशरूम की ब्रांड एम्बेसडर’ बनाया है। हालांकि दिव्या की यहां तक पहुंचने की यात्री इतनी सरल भी नहीं रही। उन्हें शुरूआत में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। पर मुश्किलों ने हारते हुए दिव्या डटीं रहीं और आज इस मुकाम पर पहुंच गई।

दिव्या इससे पहले प्राइवेट नौकरी करती थीं। लेकिन 2013 में नौकरी छोड़ वो अपने प्रदेश आ गई और यहां रहकर 2015 में दिव्या ने मशरूम की खेती शुरू की। अब इसके जरिये वो क्षेत्र में हो रहे किसानों के पलायन को रोकने का भी काम कर रही हैं। अब तक दिव्या हजारों लोगों को मशरूम की ट्रेनिंग दे चुकी हैं और सैकड़ों लोग उनसे प्रेरणा लेकर मशरूम यूनिट लगा चुके हैं।

अब दिव्या हिमालय क्षेत्र में पाए जाने वाली कीड़ाजड़ी की एक प्रजाति कार्डिसेफ मिलिटरीज़ का भी उत्पादन करती हैं, जिसकी बाज़ार में कीमत 2 से 3 लाख रुपये प्रति किलो तक हो सकती है। कीड़ाजड़ी के व्यावसायिक उत्पादन के लिए दिव्या ने कई लैब की स्थापना की है।

बता दें कि मशरूम की खेती एक बहुत ही अच्छा कृषि व्यवसाय है क्योंकि इसे बहुत ही कम लागत में शुरू किया जा सकता है और बहुत ही कम समय में अच्छा पैसा कमाया जा सकता है। इसमें लागत की तुलना में मुनाफा कई गुना ज्यादा होता है। आप अपना खुद का मशरूम खेती/व्यवसाय शुरू कर सकते हैं। इसमें तकनीकी ज्ञान आवश्यक है इसलिए आपको पहले तकनीकी ट्रेनिंग की आवश्यकता होगी।

कुछ साल पहले तक मशरूम केवल बड़े बडे शहरों में रहने वाले लोगों के मैन्यु की डिश हुआ करती थी। लेकिन उत्तराखंड में मशरूम क्रांति नें मशरूम को घर घर तक पहुंचा दिया है। अब उत्तराखंड के गांवों में लोग मशरूम के बारे में जानकारी रखते हैं, उनके भोजन में भी मशरूम की डिश उपलब्ध है। यही नहीं गांव वाले खुद मशरूम भी उगाते हैं। जिससे गांवों में रोजगार के अवसरों का सृजन हुआ व स्वरोजगार को बढ़ावा मिला है।

दिव्या का कहना है कि मैं चाहती हूं कि लोगों को मशरूम उत्पादन का सही तकनीकी ज्ञान हो। जिससे उत्पादकों को मशरूम उत्पादन में किसी भी प्रकार की परेशानी न हो। मैं लोगों को इस दिशा में जागरूक करना चाहती हूं। अब देहरादून में ही मशरूम का बीज मेरे द्वारा ‘सौम्या फूड प्राइवेट कंपनी’ के माध्यम से उपलब्ध कराया जा चुका है। ताकि किसान को भटकना न पड़े। हम उत्तराखंड को भारत की मशरूम राजधानी बनाना चाहते हैं।

दिव्या के मुताबिक मशरूम की मांग में इजाफा हो रहा है। इसे देखते हुए मशरूम को बड़े पैमाने पर उत्पादन की आवश्यकता है। वैसे तो मशरूम के उत्पादन में लगातार इजाफा हो रहा है, लेकिन जितनी मांग है, उसे देखते हुए वह बहुत कम है। हालांकि अब गांव ही नहीं, शहरों में भी शिक्षित युवा मशरूम उत्पादन को करियर के रूप में अपनाने लगे हैं।

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  1. Pingback: Earned Rs.40 thousand from small Mushroom plant in 15 days only

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