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ऑक्सीजन सप्लाई के लिए ग्रीन कॉरिडोर, किसी भी रेड सिग्नल पर नहीं रुकेगी रेल

OXYGEN Express Train

Side Story

ऑक्सीजन सप्लाई के लिए ग्रीन कॉरिडोर, किसी भी रेड सिग्नल पर नहीं रुकेगी रेल

कोविड संक्रमण में कुछ स्वास्थ्य स्थितियों के उपचार में ऑक्सीजन की उपलब्धता एक मुख्य अंग है। कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच ऑक्सीजन सप्लाई की कमी की खबरें आ रही हैं, जिसके बाद रेलवे ने सप्लाई को दुरूस्त करने के लिए कमर कस ली है। रेलवे सभी मुख्य कॉरिडोर पर तरल मेडिकल ऑक्सीजन (एलएमओ) और ऑक्सीजन सिलेंडर पहुंचाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

दरअसल भारतीय रेलवे ने लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन और ऑक्सीजन सिलेंडरों को ले जाने के लिए “ऑक्सीजन एक्सप्रेस” नामक ट्रेन चलाने की योजना बनाई है। इन ट्रेनों को निर्बाध गति से चलाने के लिए देश में ग्रीन कॉरिडोर बनाए जा रहे हैं।

इसके तहत महाराष्ट्र से खाली टैंकर सोमवार 19 अप्रैल को चलेंगे जो विशाखापत्तनम, जमशेदपुर, राउरकेला, बोकारो से ऑक्सीजन उठाएंगे। रेलवे ने यह भी बताया कि टेक्निकल ट्रायल पूरा होने के बाद खाली टैंकरों को कलमबोली/बोइसर से मुंबई भेजा जाएगा और फिर वहां से वाइजाग (विशाखपत्तनम)/जमशेदपुर/राउरकेला/बोकारो भेजा जायेगा। वहां इन टैंकरों में लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन भरी जाएगी।

Corona Oxygen Cylinder

रेल मंत्रालय के अनुसार ऑक्सीजन एक्सप्रेस रोल ऑन, रोल ऑफ मॉडल पर चलाई जायेगी, जिसके तहत तरल ऑक्सीजन सीजन से भरे टैंकरों को रेल के फ्लैट डिब्बों के ऊपर चढ़ा दिया जाएगा और गंतव्य पर पहुंचने के बाद उन्हें उतारा जाएगा।

बता दें, ऑक्सीजन एक्सप्रेस में टी-1618 टैंकरों का इस्तेमाल किया जायेगा। इस टैंकर से ऑक्सीजन भेजना बाकी मालवाहक टैंकरों के मुकाबले काफी आसान है। इस टैंकर के रेलवे लाइनों पर बने ओवरब्रिज की ऊंचाई समेत ट्रैक के ऊपर लगे बिजली के तारों में फंसने की प्रायिकता लगभग न के बराबर है। इन टैंकरों पर चालक समेत कुल 2 लोगों को यात्रा करने की अनुमति होगी। साथ ही साथ इन दोनों व्यक्तियों को यात्रा के लिए द्वितीय श्रेणी (सामान्य) का यात्रा टिकट खरीदना होगा।

क्या है ग्रीन कॉरिडोर ?

क्या है ग्रीन कॉरिडोर ?

क्या है ग्रीन कॉरिडोर ?

ग्रीन कॉरिडोर का चिकित्सा में तब प्रयोग किया जाता है जब किसी आपातकाल की स्थिति में किसी मरीज को जरूरी इलाज की आवश्यकता होती है। जैसे किसी हृदय या लीवर जैसी गंभीर परिस्थिति के लिए मरीज या अंग प्रत्यारोपण किया जाना हो, उपयोगी चिकित्सा उपकरण पहुंचाना, यानि मेडिकल इमरजेंसी परिस्थिति में एक से दूसरे स्थान तक जाने के लिए कम से कम समय लगे तब ग्रीन कॉरिडॉर बनाया जाता है। इस कार्य में पुलिस के पास सबसे ज्यादा चुनौती होती है।

कैसे होता है काम ?

ग्रीन कॉरिडोर असल में अस्पताल और पुलिस के आपसी सहयोग से अस्थायी तौर पर बनाया जाने वाला एक रास्ता होता है, जिसमें कुछ देर के लिए ट्रैफिक को रोक दिया जाता है या एक नया रूट बनाया जाता है। ताकि एंबुलेंस या जरूरी मेडिकल वाहन को एक से दूसरी जगह जाने के लिए कम से कम समय लगे। इस तरह कम समय में मरीज को चिकित्सा सेवा मुहैया करवा दी जाती है जिसकी वजह से किसी की जिंदगी बचाने के लिए आपातकाल में लगने वाला समय कम हो जाता है। वैसे ग्रीन कॉरिडोर कई तरह से काम करता है। इस प्रक्रिया में कई बार अलग-अलग तरह के विशेष रूट भी तैयार किए जाते हैं।

देश में ग्रीन कॉरिडोर बनाकर पुलिस कर रही मदद

कोरोना काल में पिछले एक साल से पुलिस ने अस्पताल तक मेडिकल से संबंधित तमाम उपकरण चाहे वैक्सीन हो, वेंटिलेटर हो, ऑक्सीजन या फिर किसी मरीज को तत्काल इलाज की जरूरत हो, देश के अलग-अलग हिस्से में पुलिस ने ग्रीन कॉरिडोर बना कर आपात सुविधा मुहैया कराई है।

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