Connect with us

बांस की खेती कर बन सकते हैं करोड़पति, सरकार दे रही है 50 फीसदी सब्सिडी

AGRICULTURE

बांस की खेती कर बन सकते हैं करोड़पति, सरकार दे रही है 50 फीसदी सब्सिडी

कई वर्षों से बांस देश के ग्रामीण क्षेत्र की जीवन रेखा रहा है। इसे ग्रीन गोल्ड या हरा सोना भी कहा जाता है। समय और प्रौद्योगिकियों के विकास के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था में ‘ग्रीन गोल्ड’ का उपयोग व्यापक रूप से बदल गया है। चाहे किसान के लिए हो या उद्योग के लिए। कुछ समय पहले, भारतीय वन अधिनियम 1972 का वर्ष 2017 में संशोधन किया गया और पेड़ों की परिभाषा से बांस को हटा दिया गया। इससे किसानों को बांस और बांस आधारित प्रोडक्ट की सुगम आवाजाही में मदद मिली।

Bamboo farming india

Subsidy on Bamboo Farming | Successful Farmer Story

बांस की खेती से बने करोड़पति

आज के समय में देश में कई ऐसे किसान है जो बांस की खेती से करोड़ों की कमाई कर रहे हैं। महाराष्ट्र के ओसमानाबाद के निपानी गांव के रहने वाले राजशेखर पाटिल 54 एकड़ में बांस की खेती करते हैं। उन्होंने पहले नर्सरी से 40 हजार पेड़ लाए और उन्हें खेतों की सीमा पर रोप दिया। दो-तीन साल बाद इन 40 हजार बांस से 10 लाख बांस पैदा हुए। जिसका उन्हें बाजार में अच्छा खासा दाम मिला। पहले साल उन्होंने 1 लाख के बांस बेचे और फिर अगले एक-दो साल में इन्हीं बांसों से उन्हें 20 लाख का फायदा हुआ। आज के समय में राजशेखर पाटिल बांस से करोड़ों की कमाई कर रहे हैं।

Indian bamboo products

Subsidy on Bamboo Farming | Successful Farmer Story

राष्ट्रीय बांस मिशन की शुरुआत

बांस की खेती के लिए केंद्र सरकार के साथ-साथ राज्य सरकारें भी सहायता करती हैं। सरकार ने 2018-19 में पुनर्गठित राष्ट्रीय बांस मिशन (NBM) की शुरुआत की है। इस मिशन के तहत बांस क्षेत्र के किसानों को उद्योग से जोड़ने से लेकर गुणवत्ता रोपण सहित कई तरह की पहल शामिल है। राष्ट्रीय बांस मिशन के अनुसार, बांस की 136 प्रजातियां हैं और सबकी अपनी विशेषताएं हैं, जैसे किसी से फर्नीचर आदि बनता है तो किसी का उपयोग भवन निर्माण में होता है। खेती की अगर बात करें तो एक बांस का पेड़ 30-40 वर्षों तक बांस देता है।

बांस की खेती के लिए केन्द्र सरकार द्वारा मिलने वाली सहायता

1. बांस की खेती के लिए सरकार की ओर से सरकारी नर्सरी से फ्री में पौधा उपलब्ध कराया जाएगा।

2. तीन साल में औसतन 240 रुपए प्रति प्लांट की लागत आएगी। इसमें से 120 रुपए प्रति प्लांट सरकार की ओर से दिए जाएंगे।

3. मिशन के अंतर्गत, उत्तरी-पूर्वी राज्यों को छोड़कर अन्य क्षेत्रों में इसकी खेती के लिए 50 फीसदी सरकार और 50 फीसदी किसान लगाएगा। 50 फीसदी सरकारी शेयर में 60 फीसदी केंद्र और 40 फीसदी राज्य की हिस्सेदारी होगी। वहीं उत्तरी-पूर्वी राज्यों में 60 फीसदी सरकार और 40 फीसदी किसान लगाएगा। 60 फीसदी सरकारी पैसे में 90 फीसदी केंद्र और 10 फीसदी राज्य सरकार का शेयर होगा।

4. मिशन के अंतर्गत हर राज्य में मिशन डायरेक्टर बनाए गए हैं और हर जिले में नोडल अधिकारी तैनात हुए हैं। इनका काम किसानों को योजना की पूरी जानकारी देना है।

Bamboo images

Subsidy on Bamboo Farming | Successful Farmer Story

भारत में बांस उद्योग 30 हजार करोड़ रुपये होने की उम्मीद

बता दें कि पिछले तीन साल में व्यावसायिक रूप से बांस 15,000 हेक्टेयर क्षेत्र में लगाया गया है। किसानों को गुणवत्तापूर्ण पौधरोपण सामग्रियों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए, मिशन के अंतर्गत 329 नर्सरियों की स्थापना की गई। इस मिशन के तहत 79 बाजार बनाए गए हैं। इसके साथ सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भी हाल ही में बांस को कोयला के विकल्प के रूप में देखने की बात कही है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि सभी हितधारकों के एकीकृत प्रयासों से भारत में बांस उद्योग 25-30 हजार करोड़ रुपये का हो जाएगा।

राष्ट्रीय बांस मिशन के तहत कैसे करें रजिस्टर?

1. रजिस्ट्रेशन के लिए बांस मिशन की आधिकारिक वेबसाइट https://nbm.nic.in/ पर जाना होगा।

2. वेबसाइट पर जाने के बाद ‘फार्मर रजिस्ट्रेशन’ पर क्लिक करके अपनी सभी जानकारी भरनी होगी।

3. रजिस्ट्रेशन फॉर्म में अपने राज्य, जिला और तहसील का चयन करने के बाद अपने गांव का चयन करना होगा। इसके बाद फाइनेंशियल ईयर की जानकारी दर्ज करके किसान का नाम और अन्य जानकारी भरनी होंगी।

4. सभी जानकारी भरने के बाद फॉर्म सबमिट कर दें।

(इनपुट- PBNS)

Facebook Comments Box
What’s your Reaction?
+1
0
+1
0
+1
0
+1
0
+1
0
+1
0
+1
0
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

To Top