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दोनों हाथों से दिव्यांग लेकिन पैर तो है ना! अपने पांव से कम्प्यूटर चलाता है ये शख्स

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दोनों हाथों से दिव्यांग लेकिन पैर तो है ना! अपने पांव से कम्प्यूटर चलाता है ये शख्स

दोनों हाथों से दिव्यांग होने के बावजूद सुनील कुमार ने हार नहीं मानी। सुनील ने लगातार मेहनत की और अपने पांव से कंप्यूटर चलाने में महारत हासिल कर ली। आज वे दोनों पांव से टाइपिंग करते हैं। सुनील कुमार के जीवन संघर्ष की कहानी किसी बॉलीवुड की फिल्मी कहानी से कम नहीं है। उन्होंने बताया कि उन्हें अपने माता-पिता के बारे में कोई जानकारी नहीं है। जब उन्हें होश भी नही संभाला था, तीन-चार साल की उमर में बिजली का शॉट लगने से दोनों हाथ जल गए। पी.जी.आई, चण्डीगढ़ के डॉक्टरों के अनुसार जली हालत में सुनील के माता-पिता ने पी.जी.आई, चण्डीगढ़ में भर्ती करवाया। सुनील कुमार के बचने की सम्भावनांए न के बराबर थी। उसके माता-पिता उसे पी.जी.आई में ही छोड़ गए। पी.जी.आई के डॉक्टरों के अथक प्रयासों से सुनील कुमार की जान तो बच गई लेकिन कंधे तक दोनों हाथ चले गए। बाजुओं के घाव ठीक होने तक उन्हें पी.जी.आई चण्डीगढ़ भर्ती रहना पड़ा।

इसके बाद सुनील के जीवन का नया अध्याय शुरू हुआ। पी.जी.आई, चण्डीगढ़ की अनुसंशा पर साकेत संस्था ने सुनील कुमार को गोद ले लिया और सुनील कुमार संस्था के छात्रावास में ही रहने लगा। सुनील कुमार की स्कूली शिक्षा भी साकेत हाई स्कूल में हुई। स्कूल शिक्षा के दौरान ही उनमें एक आर्टिस्ट का फन हिल्लारे ले रहा था तो उसने अपने साथियों के साथ पैरों से पेंटिंग करना शुरू किया।

एक लम्बे संघर्ष और जद्दोजहद से सुनील कुमार ने की फुट आर्टिस्ट के रूप में पहचान बनाई। उन्होंने पेंटिंग (आर्ट) के क्षेत्र में कई राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लिया और बेहतरीन ‘‘फुट आर्टिस्ट‘‘ के रूप में स्थान हासिल किया। सुनील कुमार ने पेंटिंग के क्षेत्र में अनेक मुकाम हासिल किए और इनाम पाए। सन् 2007 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल द्वारा इन्हें ‘‘बैस्ट क्रिएटिव चाईल्ड’’ अवार्ड से नवाजा गया। यह क्षण सुनील के जीवन में बेहद उत्साहित करने वाला था। इसके बाद इनका हौसला बढ़ा और स्थाई रोजगार के लिए प्रयास शुरू किए।

इस दौरान सुनील कुमार ने स्थाई रोजगार पाने के लिए भी संघर्ष शुरू किया और अपने पैरों की उंगलियों से टाईप का कार्य सीखा। अच्छे अभ्यास से सुनील की पैरों की उंगलिया टाईप व कम्प्यूटर के की-बोर्ड पर उंगलियां ऐसे चलने लगी मानों ये पांव की उंगलियां टाईप व कम्प्यूटर के लिए ही बनी हैं। टाईप सीखने के बाद उन्होंने आउटसोर्सिंग के माध्यम से साकेत संस्था में ही नौकरी मिली। यह संस्था हरियाणा के राज्यपाल के तहत कार्य कर रही है। जब राजभवन के अधिकारियों को सुनील की इस प्रतिभा का पता चला तो इनकी पोस्टिंग राजभवन कार्यालय में सचिव/राज्यपाल स्टाफ में की गई।

वर्तमान में सुनील कुमार कम्प्यूटर ऑपरेटिंग के साथ-साथ हिन्दी व अंग्रेजी की टाईप का कार्य न केवल बखूबी से कर रहा है बल्कि अच्छी स्पीड वाले टाईपिस्ट भी इसके कार्य से आश्चर्यचकित रह जाते हैं। अपनी कार्य कुशलता और अच्छे व्यवहार की वजह से सुनील कुमार सबका चहेता है। इसी वजह से पूर्व राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य ने इन्हें अपने कर कमलों से राजभवन में आयोजित राज्य स्तरीय गणतंत्र दिवस समारोह में सम्मानित किया। पिछले दिनों हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने राजभवन कार्यालय निरीक्षण के दौरान सचिव/राज्यपाल के स्टाफ में कार्यरत सुनील से मुलाकात की और उनका उत्सावर्धन किया।

राज्यपाल के सचिव अतुल द्विवेदी सुनील कुमार को हमेशा उत्साहित करते रहते हैं। उन्होंने स्टाफ के सभी अधिकारियों को भी कहा कि सभी सुनील कुमार को भरपूर सहयोग दें। सुनील के जीवन के संघर्ष की कहानी युवाओं को प्रेरणा देने वाली है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति संघर्ष और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ना चाहे तो हर बड़ी से बड़ी बाधा को मात दे सकता है।

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